बड़ी खबर : गुजरात में बीजेपी की जीत नहीं बल्कि हार हो रही है

गुजरात चुनाव के मैदान में उतरे सभी नेताओं और राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला हो चुका है – और उनकी किस्मत EVM के साथ सील हो चुकी है. 18 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी और नतीजे भी आ जाएंगे. तब तक एग्जिट पोल और अनुमानों के बीच जीत और हार की बातें झूलती रहेंगी.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस चुनाव में 150 सीटें जीतने का दावा किया है, जबकि उनके राजनीतिक विरोधी अहमद पटेल का दावा है कि कांग्रेस 110 सीटों पर जीत दर्ज करेगी.

चुनाव में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख दांव पर लगी है, तो दूसरी ओर राहुल गांधी के लिए कांग्रेस गुजरात चुनाव को लांच पैड के तौर पर इस्तेमाल कर रही है.

अब तक जितने भी अनुमान लगाये जा रहे हैं उसमें कांग्रेस जबरदस्त चुनौती दे रही है, लेकिन नंबर वन बीजेपी ही है. मुमकिन है बीजेपी सरकार बना भी ले, लेकिन जैसे तैसे सरकार बनाना सत्ताधारी पार्टी और ब्रांड मोदी के लिए हार जैसा ही समझा जाएगा.

गुजरात एग्जिट पोल : न बीजेपी की 150 सीट, न कांग्रेस की बुरी हार. गुजरात एग्जिट पोल : न बीजेपी की 150 सीट, न कांग्रेस की बुरी हार.

योगेंद्र यादव का अनुमान

राजनीतिक पारी शुरू करने से पहले मशहूर चुनाव विश्लेषक रह चुके योगेंद्र यादव ने सबसे पहले भविष्यवाणी की है. गुजरात के चुनाव नतीजों को लेकर योगेंद्र यादव ने तीन संबावनाएं जतायी हैं. खास बात ये है कि तीनों ही नतीजों में बीजेपी की हार बतायी गयी है.

shah, modiदेश बदल रहा है…

योगेंद्र यादव ने एक अनुमान में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों को 43-43 फीसदी वोट मिलने की बात कही है. इसमें बीजेपी को 86 जबकि कांग्रेस को 92 सीटें मिल सकती हैं. गुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा में 92 ही बहुमत का जादुई आंकड़ा है.

योगेंद्र यादव के दूसरे अनुमान के अनुसार कांग्रेस को 45 फीसदी वोटों के साथ 113 सीटें और बीजेपी को 41 फीसदी वोटों के साथ 65 सीटें मिलने की संभावना है. योगेंद्र यादव ने नतीजों को लेकर तीसरी संभावना भी जतायी है जिसमें उन्होंने कहा है कि बीजेपी की बड़ी हार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. योगेंद्र यादव ने इसे ट्विटर पर शेयर किया है.

My projections for Gujarat

Scenario1: Possible
BJP 43% votes, 86 seats
INC 43% votes, 92 seats

Scenario 2: Likely
BJP 41% votes, 65 seats
INC 45% votes, 113 seats

Scenario 3: Can’t be ruled out
Even bigger defeat for the BJP

योगेंद्र यादव के इस ट्वीट पर बड़ी संख्या में लोगों ने रिएक्ट किया है – और इसे 18 दिसंबर तक संभाल कर रखने की सलाह दी है ताकि इसकी तस्दीक हो सके.

जैसे तैसे जीत भी जाये तो क्या…

कई सीनियर पत्रकारों के आकलन और एग्जिट पोल के अनुमान योगेंद्र यादव के अनुमान से मैच नहीं कर रहे हैं. ज्यादातर सर्वे में कांग्रेस की जोरदार मौजूदगी तो दर्ज की गयी है, लेकिन बीजेपी हार जाएगी ऐसा दावा कोई नहीं कर रहा. अब एक ही बात रह जाती है कि बीजेपी किसी तरह जीत जाये या संख्या बल कम होने पर भी सरकार बना ले तो उसे किस नजरिये से देखा जाना चाहिये. गुजरात में बीजेपी की जीत के बाद सरकार बनाने की कुछ संभावनाएं ऐसी भी हो सकती हैं.

1. फर्ज कीजिए बीजेपी बहुमत के आंकड़े को छू लेती है. गुजरात विधानसभा में 182 सीटें हैं जहां बहुमत की संख्या 92 है. बीजेपी को अगर इस चुनाव में 92 सीटें मिल जायें तो सरकार बनाने का दावा अधिकार के साथ पेश कर सकती है. बीजेपी 92 सीटें जीत कर सरकार बना भी ले तो क्या ये कोई सम्मानजनक जीत कही जा सकेगी? ये तो जीत कर भी बीजेपी की हार जैसा ही समझा जाएगा.

shah, modiस्वर्णिम काल?

2. मान लीजिए, बीजेपी को उतनी सीटें मिल जाती हैं जितनी पिछली बार मिली थीं. 2012 में बीजेपी को 115 सीटें मिली थीं. अगर इस बार भी बीजेपी इस नंबर की बराबरी कर ले तो क्या ये जीत अमित शाह के दावों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद के हिसाब से जीत जैसी मानी जा सकती है?

3. एक संभावना ये है कि 92 न सही, बीजेपी को सरकार बनाने के लिए कुछ सीटें कम पड़ती हैं. ऐसे में बीजेपी बड़े आराम से कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला कर सरकार बना सकती है. क्या ऐसे सरकार बनाना हार जैसा नहीं माना जाएगा?

4. संभव है बीजेपी को कांग्रेस से भी कम सीटें मिल पायें. बीजेपी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए माना जा सकता है कि वो गोवा और मणिपुर की तरह कांग्रेस को चकमा देते हुए अपनी सरकार बना ले. तो क्या इसे बीजेपी की चुनाव जीत कर बनायी हुई सरकार समझा जाएगा?

इनके अलावे भी कुछ संभावनाएं पैदा हो सकती हैं जिनमें बीजेपी कोई न कोई जुगाड़ अपना कर सरकार बनाने में कामयाब हो जाये. फिर क्या मोदी-शाह की जोड़ी सवालों से बच पाएगी. फिर बीजेपी अध्यक्ष शाह के स्वर्णिम काल के सपने का क्या होगा? फिर विकास के गुजरात मॉडल का क्या होगा? फिर मोदी लहर की बातें तो खत्म ही समझी जाएंगी. तब न्यू इंडिया की उम्मीदों का क्या होगा? आने वालों विधानसभा चुनावों में बीजेपी किस दम पर बड़े बड़े दावे कर सकेगी? सबसे बड़ी बात – 2019 में वास्तव में क्या होगा?

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